आईसीडी तुगलकाबाद को क्यो न बंद कर दिया जाये?

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नई दिल्ली। गन्दगी की ढेर पर बना एशिया का सबसे बड़ा ड्राई पोर्ट जहां उत्तरी भारत के कई राज्यों का माल इम्पोर्ट तथा एक्सपोर्ट होता है। खास तौर पर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल आदि। सुई से लेकर कार तक हर आईटम यहां आती और जाती है। शयद ही कोई आईटम हो जो चाइना से यहां न आती हो रोजाना यहां हजारों कंटेनरों की आवा जाही है। कॉनकोर भारत सरकार के रेलवे मंत्रालय का यह उपक्रम करोड़ों रुपए का रेवेन्यू यहां से रोज ्र९‘क१ ्िन१‘ है व्यवस्था के नाम पर जीरो। भ्रष्टाचार के नाम पर नम्बर वन है। यह पोर्ट कस्टम के लिये तो यह महान तीर्थ है और कॉनकोर के लिए सोने के अण्डे देने वाली मुर्गी। हर साल यहां कोई न कोई हादसा होता है यहां अगर हादसा नहीं होता तो समझो की कुदरत की दया है या किसी की भक्ति है कि साल ठीक निकल गया। लापरवाही की यहां कोई कमी नहीं है। रेवेन्यू न्यूज ने यहां लिख-लिख कर कई सुधार करवाये है। 3400 बम जो भूषण स्टील स्क्रैप में आये थे वह सालों पड़े रहे तब भी हमने लिखा था और इलैक्ट्रॉनिक मीडिया में दिखाया गया तब जाकर वह बम हटाये गये। आज जो इतना बड़ा हादसा टल गया। 500 बच्चे केमिकल की जद में आकर बीमार हुये। भगवान का शुक्रिया है कि सब का बच-बचाओ हो गया। लापरवाही की कोई ीिँ नहीं थी। कई अखबारें लिख रही है। अभी 6 कंटेनर और बताये जा रहे है कब क्या हो जाये पता नहीं 350 कंटेनर और पड़े है। 30-40 कंटेनर पटाखों के बताये जा रहे है इतना बारूद है यहां बहुत बड़ा हादसा भी हो सकता है। क्यों ना शिफ्ट कर दिया जाये इस सोने के अण्डे देने वाली फैक्ट्री को? दिल्ली के आस-पास कितने और पोर्ट खुल चुके है जैसे कि सोनीपत, दादरी, लोनी, पातली, बल्लभगढ़ कितने और पोर्ट है जहां पर यह काम शिफ्ट हो सकता है अब समय आ गया है कि इस पोर्ट को हटाया जाये। इस पोर्ट की वजह से सैकड़ो कंटेनर दिल्ली में जाम की तथा पॉल्यूशन की स्थिति बना देते है। कौन है वह जो इस पोर्ट को शिफ्ट करने में रूकावट बना हुआ है। सरकार अगर गंभीर नहीं हुई इस मुद्दे पर तो कुछ भी हो सकता है। देश में अफसर तथा नेता लंबी-लंबी बातें करते है मगर कुछ छोटे काम जो जल्दी हो सकते है वह नहीं कर पाते है।

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