अंबिका ओवरसीज में एक्साइज ड्यूटी में गड़बड़ी का केस दायर

Graphic1 जालंधर: सेंट्रल एक्साइज डिवीजन-1 अंबिका ओवरसीज के पार्टनर मानकरण भंडारी और उनके बेटे समीर भंडारी के खिलाफ कोर्ट पहुंच गई है। कंपनी में 3,87,04,629 रुपए की एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) की गड़बड़ी विभाग ने पकड़ी थी। विभाग ने इतनी ही एक्साइज ड्यूटी की गड़बड़ी पकड़ी थी।
उतनी ही रकम की पैनल्टी लगाई है। विभाग के एडवोकेट बलराम शक्ति ने सीजेएम कोर्ट में सेंट्रल एक्स एक्ट के तहत मानकरण भंडारी और समीर भंडारी के खिलाफ केस फाइल किया है। इस फाइल में 356 डॉक्यूमेंट लगाए गए हैं। केस की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी। ट्रायल शुरू करने के लिए कोर्ट इस तारीख पर दोनों को समन जारी करेगी। केस फाइल में कहा गया है कि सेंट्रल एक्साइज डिविजन-1 की टीम ने 17 जुलाई 2012 को बस्ती शेख रोड स्थित अंबिका ओवरसीज पर रेड की थी।
विभाग ने कहा है कि जांच में यह बात सामने आई थी कि इन की एक और फैक्टरी अंबिका इंडस्ट्री हिमाचल प्रदेश के ऊना के गांव बाथू टालीवाल में है। अंबिका इंडस्ट्री में कोई सामान तैयार नहीं होता था। सारा सामान अंबिका ओवरसीज में ही होता था। यहां पर ही कच्चे माल से लेकर बिजनेस से जुड़े डॉक्यूमेंट मिले थे। विभाग ने करीब पांच साल तक के रिकॉर्ड की करीब साढ़े तीन साल तक जांच की। जांच के दौरान भंडारी पार्टनर को कारण बताओ नोटिस जारी कर बुलाया था।
उन्होंने केस को लेकर अपना पक्ष रखा था, मगर विभाग संतुष्ट नहीं हुआ। विभाग ने जांच में 3 करोड़ 87 लाख 4 हजार 629 रुपए की एक्साइड ड्यूटी की गड़बड़ी पाई। विभाग की डिप्टी कमिश्नर दलजीत कौर की सुपरविजन में सारी जांच की गई।
विभाग ने अंबिका ओवरसीज पर 3 करोड़ 87 लाख 4 हजार 629 रुपए की पेनल्टी लगा दी। कंपनी से विभाग अब 7 करोड़ 74 लाख 9 हजार 258 रुपए वसूलने की अगल से तैयारी कर रही है। चंडीगढ़ हैडक्वार्टर से विभाग ने मंजूरी लेते हुए वीरवार को भंडारी पार्टनर पर केस फाइल कर दिया।
नोटिस को टैक्स ट्रिब्यूनल में चैलेंज किया रू भंडारी
हमारा केस सेंट्रल एक्साइज के ट्रिब्यूनल में है। उसकी सुनवाई 29 अगस्त को है। हमारी हिमाचल की फैक्ट्री में सेंट्रल एक्साइज की टीम 2012 में गई थी। उन्हें अंदेशा था कि हम सिर्फ बिलिंग कर रहे हैं। प्रोडक्शन नहीं कर रहे। जब टीम आई तो फैक्ट्री चलती हुई मिली। जिसके बाद ये टीम जालंधर आई। हमने टैक्स को लेकर कोई गलती नहीं की थी।
इस पर कई साल पुराने से पुराने दस्तावेज टीम साथ ले गई। हमें 3 करोड़ 87 लाख रुपए का नोटिस दिया। हमने इसे टैक्स ट्रिब्यूनल में चैलेंज किया है। जिसके फैसला आना बाकी है। फिर स्थानीय कोर्ट में क्यों केस दायर किया है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। हमसे इस केस को लेकर विभाग ने कोई संपर्क नहीं किया है।
सौजन्य से: दैनिक भास्कर

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